Friday, 20 December 2013
Tuesday, 17 December 2013
तेरी बारात लाने की देरी है
कुछ दिन हुए बदली थीं अंगूठियाँ हमने,
बंध गए थे कुछ अनकहे कसम में,
उन कसमों को निभाने की हसरत अब मेरी है!!
मुलायम हाथों पे मेहंदी उकेरी है, कि तेरी बारात लाने की देरी है!!
बैंड-बाजे भी आएँगे संग उनके,
कुछ गाएँगे, कुछ लगाएंगे ठुमके,
उन ठुमकों संग झूम जाने की हसरत अब मेरी है!!
मुलायम हाथों पे मेहंदी उकेरी है, कि तेरी बारात लाने की देरी है!!
दो कुर्सियों पे नज़र होंगे हजारों के,
ये लम्हात कैसे वहाँ गुजारोगे,
नज़र-ए-बाज़ार तुझसे नज़र लड़ाने की हसरत अब मेरी है!!
मुलायम हाथों पे मेहंदी उकेरी है, कि तेरी बारात लाने की देरी है!!
मंडप में तुम मेरा इंतज़ार करोगे,
पंडित मंत्र पढ़ेगा, तुम आहें भरोगे,
तेरी उन आहों को इंतज़ार न कराने की हसरत अब मेरी है!!
मुलायम हाथों पे मेहंदी उकेरी है, कि तेरी बारात लाने की देरी है!!
मेरी माँग में सिंदूर भरेगी,
जो मुझे तेरे नाम कर देगी,
खुद को तेरे नाम कर देने की हसरत अब मेरी है!!
मुलायम हाथों पे मेहंदी उकेरी है, कि तेरी बारात लाने की देरी है!!
मंगलसूत्र संग तुम्हें बाँध लूँगी,
कभी टूटे ना ऐसी गाँठ बाँधूँगी,
इस बंधन के बदले तेरी हर बंधनों में बंधने की हसरत अब मेरी है!!
मुलायम हाथों पे मेहंदी उकेरी है, कि तेरी बारात लाने की देरी है!!
सात वचनों के सात फेरे होंगे,
फिर तुम मेरे और हम तेरे होंगे,
इन मेरे-तेरे को हमारे और अपने में बदलने की हसरत अब मेरी है!!
मुलायम हाथों पे मेहंदी उकेरी है, कि तेरी बारात लाने की देरी है!!
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