Thursday, 30 June 2016

संगम



वो हज़ारों मील बहकर
नदी समंदरों से मिलती है,
उसे लगता है
फूल-ए-इश्क़ बस वहीं जाकर खिलती है।

अपना वजूद खोकर
जब नदी लहरों के संग उठती है,
कई नदियाँ
समंदर के छोर पे मिलती हुई दिखती हैं।

इस बेवफ़ाई पे
उसे नदियों का संगम याद आता है,
जो समंदर में मिलने तक
उसका साथ निभाता है।

Friday, 8 January 2016

तो क्या हुआ?



वो साल बुरा था…
तो क्या हुआ?
वो बस बारह महीनों का ही तो था।

वो महीना बुरा था…
तो क्या हुआ?
वो बस चार हफ़्तों का ही तो था।

वो हफ़्ता बुरा था…
तो क्या हुआ?
वो बस सात दिनों का ही तो था।

वो दिन बुरा था…
तो क्या हुआ?
वो बस चौबीस घंटों का ही तो था।