तेरी हर अदा, तेरे हर अंदाज़..
जानने हैं मुझे तेरे सब राज़।
देखना है मुझे वो सब,
जिस-जिस पे तुझे है नाज़।
आज न कर कोई रोक-टोक,
यहाँ कोई नहीं.. मैं तेरे घर पे हूँ।
तेरे हुस्न के सुहाने से सफ़र पे हूँ,
सिर से पाँव तक जाना है.. अभी कमर पे हूँ!
ना रहें हम दोनों
एक-दूसरे से अनजाने,
दिखा दे मुझे तू
अपने सारे ख़ज़ाने।
ला, एक-एक गहना
मैं पहचान लूँ,
तेरे हाथों को
अपने हाथों में थाम लूँ।
ना रख दरमियाँ कोई बंदिश,
खोल दे सारे दरवाज़े.. मैं तेरे दर पे हूँ।
तेरे हुस्न के सुहाने से सफ़र पे हूँ,
सिर से पाँव तक जाना है.. अभी कमर पे हूँ!
तेरी हर अदा, तेरे हर अंदाज़..जानने हैं मुझे तेरे सब राज़।
देखना है मुझे वो सब,
जिस-जिस पे तुझे है नाज़।
आज न कर कोई रोक-टोक,
यहाँ कोई नहीं.. मैं तेरे घर पे हूँ।
तेरे हुस्न के सुहाने से सफ़र पे हूँ,
सिर से पाँव तक जाना है.. अभी कमर पे हूँ!
ना रहें हम दोनों
एक-दूसरे से अनजाने,
दिखा दे मुझे तू
अपने सारे ख़ज़ाने।
ला, एक-एक गहना
मैं पहचान लूँ,
तेरे हाथों को
अपने हाथों में थाम लूँ।
ना रख दरमियाँ कोई बंदिश,
खोल दे सारे दरवाज़े.. मैं तेरे दर पे हूँ।
तेरे हुस्न के सुहाने से सफ़र पे हूँ,
सिर से पाँव तक जाना है.. अभी कमर पे हूँ!



