वो हज़ारों मील बहकर
नदी समंदरों से मिलती है,
उसे लगता है
फूल-ए-इश्क़ बस वहीं जाकर खिलती है।
अपना वजूद खोकर
जब नदी लहरों के संग उठती है,
कई नदियाँ
समंदर के छोर पे मिलती हुई दिखती हैं।
इस बेवफ़ाई पे
उसे नदियों का संगम याद आता है,
जो समंदर में मिलने तक
उसका साथ निभाता है।