दिल में जो लगी आग तो माचिस तेरी थी,
पानी था तेरे पास पर तूने नज़रें फेरी थी।
तेरी आग ने दिल की परतें उधेड़ी थी,
मैं जलता रहा.. गलती मेरी थी।
सूखे ज़ख्मों ने निशाँ कुछ यूँ उकेरी थी,
दिल की दीवारें काली, घुप्प अँधेरी थी।
सन्नाटे में यादों ने चिंगारी बिखेरी थी,
फफक उठती, बस हवा देने की देरी थी।
दिल में जो लगी आग तो माचिस तेरी थी,
पानी था तेरे पास पर तूने नज़रें फेरी थी।

