Friday, 8 January 2016

तो क्या हुआ?



वो साल बुरा था…
तो क्या हुआ?
वो बस बारह महीनों का ही तो था।

वो महीना बुरा था…
तो क्या हुआ?
वो बस चार हफ़्तों का ही तो था।

वो हफ़्ता बुरा था…
तो क्या हुआ?
वो बस सात दिनों का ही तो था।

वो दिन बुरा था…
तो क्या हुआ?
वो बस चौबीस घंटों का ही तो था।

1 comment:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (10-01-2016) को "विवेकानन्द का चिंतन" (चर्चा अंक-2217) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    नववर्ष 2016 की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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