तेरे दिल के बागीचे में,
वहीं पे कहीं हाँ नीचे में..
मैं गिर गया,
गिर के सूख गया।
कोई नया खिला,
जिसपे तेरा रुख गया।
मैं फूल था,
तू ज़मीन-ए-बागीचा।
मुझे भी था..
तुमने प्यार से सींचा।
मेरा नसीब था
गिर के तुझमें खो जाना,
तेरे नसीब में फूल ही फूल..
एक को छोड़
दूसरे का हो जाना।
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