Sunday, 12 February 2012

अपने मुँह मियाँ मीठू

मैं और मेरा दर्जी मास्टर
अक्सर ये बातें करते हैं. .
“कैसे भी कपड़े सिल देता हूँ,
पर आप उनमें बड़े अच्छे लगते हैं!”


ये जो सुई-धागे की कढ़ाई
मेरे कपड़ों पे की है,
कहीं गलत भी है,
कहीं सही भी है।

पर आप इसे पहन लो
तो छुप जाती हैं सारी गलतियाँ,
जो भी थोड़ी-बहुत
मैंने की हैं।


ये कॉलर, ये बाजूबंद
जो तुमने बनाए हैं,
बड़े ओल्ड-फैशन हैं. .

“सर, आप पहन भर लो
तो दुनिया कहेगी..
यही तो लेटेस्ट फैशन है!”

क्या कहूँ…
तुम बहुत मलाई लगाते हो!
“इसीलिए तो शायद
आप मेरे पास सिलाई करवाते हो. .”

अब और क्या लिखूँ
मेरी और मेरे दर्जी की ये बातें,
फिर आप ही कहोगे..
“ये कवि अपने मुँह मियाँ मीठू बन जाते हैं।” 

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