Friday, 4 May 2012

ये हालातें, तेरी भी होंगी शायद

रुंध गईं आँखें,
याद आईं बातें,
तेरी-मेरी बातें…
ये हालातें
तेरी भी होंगी शायद।

तस्वीर तेरी
आँखों में मेरी
बस-सी गई है,
चाहे भी तो ना जाए…
ये हालातें
तेरी भी होंगी शायद।

सुनता हूँ तुझको
बिन तेरे बोले,
आवाज़ तेरी
लगे गीत गाते…
ये हालातें
तेरी भी होंगी शायद।

खल-सी रही है
तुझसे जुदाई,
गहरी होती खाई
खुद ही भर जाए…
ये हालातें
तेरी भी होंगी शायद।

प्यार नहीं जानूँ,
इश्क़ ना पहचानूँ,
तुझको अपना मानूँ,
फिरूँ दिल में छुपाए…
ये हालातें
तेरी भी होंगी शायद।

खुद से पूछता हूँ,
क्यूँ तुझको ढूँढता हूँ,
दिल कहना चाहे
ज़ुबाँ कह ना पाए…
ये हालातें
तेरी भी होंगी शायद।

रुंध गईं आँखें,
याद आईं बातें,
तेरी-मेरी बातें…
ये हालातें
तेरी भी होंगी शायद।

6 comments:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    लिंक आपका है यहीं, मगर आपको खोजना पड़ेगा!
    इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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  2. कोमल अभिव्यक्ति, अति सुंदर

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  3. bahut sundar ,bar bar padhne ko dil karta hai

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  4. सुन्दर भावभीनी अभिव्यक्ति...

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