रुंध गईं आँखें,
याद आईं बातें,
तेरी-मेरी बातें…
ये हालातें
तेरी भी होंगी शायद।
याद आईं बातें,
तेरी-मेरी बातें…
ये हालातें
तेरी भी होंगी शायद।
तस्वीर तेरी
आँखों में मेरी
बस-सी गई है,
चाहे भी तो ना जाए…
ये हालातें
तेरी भी होंगी शायद।
खल-सी रही है
तुझसे जुदाई,
गहरी होती खाई
खुद ही भर जाए…
ये हालातें
तेरी भी होंगी शायद।
प्यार नहीं जानूँ,
इश्क़ ना पहचानूँ,
तुझको अपना मानूँ,
फिरूँ दिल में छुपाए…
ये हालातें
तेरी भी होंगी शायद।
खुद से पूछता हूँ,
क्यूँ तुझको ढूँढता हूँ,
दिल कहना चाहे
ज़ुबाँ कह ना पाए…
ये हालातें
तेरी भी होंगी शायद।
रुंध गईं आँखें,
याद आईं बातें,
तेरी-मेरी बातें…
ये हालातें
तेरी भी होंगी शायद।

nice
ReplyDeleteबहुत सुंदर सार्थक अभिव्यक्ति // बेहतरीन रचना //
ReplyDeleteMY RECENT POST ....काव्यान्जलि ....:ऐसे रात गुजारी हमने.....
MY RECENT POST .....फुहार....: प्रिया तुम चली आना.....
बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
ReplyDeleteलिंक आपका है यहीं, मगर आपको खोजना पड़ेगा!
इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
सूचनार्थ!
कोमल अभिव्यक्ति, अति सुंदर
ReplyDeletebahut sundar ,bar bar padhne ko dil karta hai
ReplyDeleteसुन्दर भावभीनी अभिव्यक्ति...
ReplyDelete